विक्की कौशल की भूत चलिए जानते हैं कि ये फिल्म कैसी है, हमारे रिव्यू में

Movie Review : बॉलीवुड में हॉरर फिल्में बनती रहती हैं, लेकिन उनमें याद रखने लायक इक्का-दुक्का ही हैं।अभी भी इसमें काफी स्कोप है। रामसे ब्रदर्स के बाद विक्रम भट्ट, एकता कपूर ने इस तरह की कुछ फिल्में बनाई हैं, अचानक किसी मूवमेंट के साथ तेज साउंड का आना, शीशे में अचानक किसी साये का प्रकट होना और कमरे में रखे सामान का अपने आप हिलने लगना जैसी चीजें दर्शक पिछले काफी वक्त से देख रहे हैं. 

अब करण जौहर जैसे बड़े निर्माता-निर्देशक के ‘धर्मा प्रोडक्शन्स’ ने भी पहली बार इस तरह की फिल्म बनाई है- ‘भूत: पार्ट वन- द हॉन्टेड शिप’। यह कहानी है एक अभिशप्त जहाज की। ऐसे में जाहिर है कि पब्लिक की उम्मीदों पर खरे उतरना एक बड़ी चुनौती थी. विक्की कौशल और फिल्म के मेकर्स इस चुनौती को किस हद तक पूरा कर पाए हैं? चलिए जानते हैं.

सच्ची घटना पर आधारित ये फिल्म हकीकत का दामन थाम कर उड़ान भरती है और आपको कल्पनाओं के उस आसमान में ले जाती है जहां आपको सब कुछ हकीकत ही लगने लगता है फिल्म के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियां होती हैं. पहली ये कि फिल्म आपको डरा पाए और दूसरी ये कि आपको ये बोर या बोझिल नहीं लगे. विक्की कौशल की फिल्म में ये दोनों ही पहलू मौजूद हैं.

एक हादसे में अपनी छोटी बेटी और पत्नी (भूमि पेडनेकर) को खो चुका पृथ्वी (विक्की कौशल) अब मुंबई में अकेला रहता है और शिपिंग ऑफिसर की नौकरी करता है. पृथ्वी खुद को अपनी पत्नी और बेटी की मौत का जिम्मेदार मानता है इसलिए उसमें इस बात का गिल्ट हमेशा बना हुआ है. वो हर वो काम करता है जिससे वो किसी बच्ची या किसी औरत की मदद कर सकता है.

पृथ्वी के दिमाग पर ये ट्रॉमा इस हद तक है कि उसे अपनी पत्नी और बेटी दिखाई देते हैं. वह डॉक्टर से अपने हैलोसिनेशन्स का इलाज तो करवा रहा है लेकिन दवाइयां नहीं लेता ताकि उसकी पत्नी और उसकी बेटी उसे हमेशा ऐसे ही नजर आते रहें. पृथ्वी का दोस्त रियाज उसे हमेशा ये सब करने के लिए टोकता रहता है लेकिन पृथ्वी नहीं मानता. सब कुछ ठीक चल रहा है और एक दिन अचानक समंदर किनारे एक सुनसान जहाज सी-बर्ड आकर खड़ा हो जाता है.

सी-बर्ड के बारे में तमाम किस्से हैं. इस जहाज के अचानक समंदर किनारे यूं आ जाने से मुंबई की जनता में खलबली है. लिहाजा पृथ्वी की कंपनी पर इस जहाज को वहां से हटाने का दबाव बढ़ जाता है. जिम्मेदारी पृथ्वी पर आती है और वह जब जहाज का मुआइना करने जाता है तो उसके साथ तमाम अजीब चीजें होना शुरू हो जाती हैं. पृथ्वी जब थोड़ी जांच पड़ताल करता है तो उसके सामने आती है रोंगटे खड़े कर देने वाली एक पहेली जिसे वो सुलझाने में लग जाता है.

पहेली के सुलझने के साथ-साथ सुलझना शुरू होती है वो कहानी जो आपको बांध कर रखती है. कहा जा सकता है कि कॉन्सेप्ट नया है. फिल्म के बीच-बीच में छोटे-छोटे जोक्स हैं जो कहानी को बहुत बोझिल होने से रोकते हैं. सी-बर्ड का वो सीक्रेट क्या है जो लोगों की जान ले रहा है? क्या विक्की कौशल का इस जहाज से कोई पुराना कनेक्शन है? क्या इस हॉन्टेड शिप का भूत विक्की कौशल की जान ले लेता है या उन्हें जाने देता है? यही फिल्म की कहानी है.

कैसी है फिल्म?

फिल्म में विक्की कौशल का अभिनय कमाल का है और कहा जा सकता है कि उन्होंने एक बार फिर से खुद को एक अच्छे अभिनेता के तौर पर साबित किया है. भूमि पेडनेकर और आशुतोष राणा का रोल भी छोटा है लेकिन उन्होंने अपना काम बखूबी किया है. हॉरर फिल्म है इसलिए ये सवाल आना जाहिर है कि क्या ये फिल्म आपको डरा पाती है? जवाब है हां. किसी भी हॉरर फिल्म में ग्राफिक्स और वीएफएक्स बहुत मायने रखते हैं और इनका काम फिल्म में काबिल-ए-तारीफ है. फिल्म के कई सीक्वेंस ऐसे हैं जब आपके रोंगटे खड़े हो जाते हैं और आप एक पल के लिए सन्न रह जाते हैं.

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Vipin Kumar
Author: Vipin Kumar

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